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प्रश्न: इस्लाम को शान्ति का धर्म कैसे कहा जा सकता है, जबकि यह तलवार से फैला है?

उत्तर: कुछ गै़र-मुस्लिम भाइयों की यह आम शिकायत है कि संसार भर में इस्लाम के मानने वालों की संख्या लाखों में भी नहीं होती यदि इस धर्म को बलपूर्वक नहीं फैलाया गया होता। निम्न बिन्दु इस तथ्य को स्पष्ट कर देंगे कि इस्लाम की सत्यता, दर्शन और तर्क ही है जिसके कारण वह पूरे विश्व में तीव्र गति से फैला, न कि तलवार से।

1. इस्लाम का अर्थ शान्ति है

इस संसार का हर इंसान शान्ति एवं सद्भाव के पक्ष में नहीं है। बहुत से इंसान अपने तुच्छ स्वार्थों के लिए शान्ति को भंग करने का प्रयास करते हैं। शान्ति बनाए रखने के लिए कभी-कभी बल-प्रयोग किया जाता है। इसी कारण हम पुलिस रखते हैं जो अपराधियों और असामाजिक तत्वों के विरुद्ध बल का प्रयोग करती है ताकि समाज में शान्ति स्थापित हो सके। इस्लाम शान्ति को बढ़ावा देता है और साथ ही जहाँ कहीं भी अत्याचार और जु़ल्म होते हैं, वह अपने अनुयायियों को इसके विरुद्ध संघर्ष हेतु प्रोत्साहित करता है। अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष में कभी-कभी बल-प्रयोग आवश्यक हो जाता है। इस्लाम में बल का प्रयोग केवल शान्ति और न्याय की स्थापना के लिए ही प्रयोग किया जा सकता है। धर्म-परिवर्तन के लिए तो बल का प्रयोग इस्लाम में निषिद्ध है और कई-कई सदियों के मुस्लिम-शासन का इतिहास कुछ संभावित नगण्य अपवादों (Exceptions) को छोड़कर, बलपूर्वक धर्म-परिवर्तन कराने से ख़ाली है। Read more

सवाल: जानवरों की हत्या एक क्रूर निर्दयतापूर्ण कार्य है तो फिर मुसलमान मांस क्यों खाते हैं?

जवाब: शाकाहार ने अब संसार भर में एक आन्दोलन का रूप ले लिया है। बहुत से लोग तो इसको जानवरों के अधिकार से जोड़ते हैं।

निस्संदेह लोगों की एक बड़ी संख्या मांसाहारी है और अन्य लोग मांस खाने को जानवरों के अधिकारों का हनन मानते हैं। इस्लाम प्रत्येक जीव एवं प्राणी के प्रति स्नेह और दया का निर्देश देता है। साथ ही इस्लाम इस बात पर भी ज़ोर देता है कि अल्लाह ने पृथ्वी, पेड़-पौधे और छोटे-बड़े हर प्रकार के जीव-जन्तुओं को इंसान के लाभ के लिए पैदा किया है। अब यह इंसान पर निर्भर करता है कि वह ईश्वर की दी हुई नेमत और अमानत के रूप में मौजूद प्रत्येक स्रोत को किस प्रकार उचित रूप से इस्तेमाल करता है। आइए इस तथ्य के अन्य पहलुओं पर विचार करते हैं-

1 एक मुसलमान पूर्ण शाकाहारी हो सकता है एक मुसलमान पूर्ण शाकाहारी होने के बावजूद एक अच्छा मुसलमान हो सकता है। मांसाहारी होना एक मुसलमान के लिए ज़रूरी नहीं है। Read more

सवाल: क्या मुसलमान हजरे अस्वद (काबा की दीवार मे लगा काला पत्थर) की पूजा करते हैं? हजरे अस्वद क्या है?

उत्तर: हजरे अस्वद काबा के दक्षनी कोने में मौजूद लाली मिला हुआ एक काला पत्थर है जो ज़मीन से डेढ़ मीटर की उंचाई पर काबा की दिवार में लगा हुआ है. यहाँ यह बताते चलें कि शुरू में हजरे अस्वद का आकार तीस सेंटी मीटर के करीब था लेकिन अनेक घटनाओं की वजह से उस में परिवर्तन आता गया तथा अब अनेक साईज़ के केवल आठ छोटे छोटे टुकड़े बचे हैं जिन में सब से बड़ा छोहारे के आकार का है , यह तमाम टुकड़े करीब ढाई फिट के आयतन में जड़े हुए हैं जिनके किनारे चांदी के गोल चक्कर घेरे हुए है. इस की हिफाज़त के लिए इसे खालिस चांदी से मढ़वाया दिया गया है। Read more

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