हिंदी में चयनित हदीसें

पैग़म्बर (सल्ल0) ने फरमाया

(1) अल्लाह के पैग़म्बर (सल्ल0) ने फ़रमाया ''सारी दुनिया अल्लाह का परिवार है। अल्लाह को सबसे अधिक प्रिय वह (व्यक्ति है जो उसके बन्दों से अच्छा व्यवहार करता है।'' (हदीस: मिशकात)

(2) अल्लाह के पैग़म्बर (सल्ल0) ने फ़रमाया, ''अल्लाह (अपने बन्दों पर) मेहरबान (दयालु) है और वह मेहरबानी (दयालुता को पसन्द करता है।'' (हदीस: बुख़ारी)

(3) अल्लाह के पैग़म्बर (सल्ल0) ने फ़रमाया, ''अल्लाह उस इनसान पर दया नहीं करता जो स्वयं दूसरे इनसानों पर दया नहीं करता।'' (हदीस: बुख़ारी, मुस्लिम)

(4) अल्लाह के पैग़म्बर (सल्ल0) ने फ़रमाया, ''तुममें से जो इसकी सामर्थ्य रखता हो कि अपने (इनसानी) भाई की सहायता कर सके तो उसे यह काम अवश्य करना चाहिए।'' (हदीस: मुस्लिम)

(5) अल्लाह के पैग़म्बर (सल्ल0) ने फ़रमाया, ''बदगुमानी से बचो, क्योंकि बदगुमानी सबसे बुरा झूठ है। लोगों के दोष न खोजो, न टोह में लगो, एक-दूसरे से ईर्ष्या न करो और न आपस में कपट रखो, बल्कि ऐ अल्लह के बन्दो! (आपस में) भाई-भाई बन जाओ।'' (हदीस: मुस्लिम)

(6) अल्लाह के पैग़म्बर (सल्ल0) ने फ़रमाया, ''जिसने किसी ज़िम्मी (इस्लामी राज्य के अधीन रहनेवाला ग़ैर-मुस्लिम) को क़त्ल किया तो अल्लाह ने जन्नत उस (क़त्ल करनेवाले) पर हराम कर दी।'' (हदीस: नसई)

(7) अल्लाह के पैग़म्बर (सल्ल0) ने फ़रमाया, ''जो मुसलमान लड़कों को लड़कियों पर श्रेष्ठ न समझे और औरत की बेइज़्ज़ती (नाक़द्री) न करे, अल्लाह उसे स्वर्ग प्रदान करेगा।'' (हदीस: तिरमिज़ी)

(8) हज़रत अबू-उमामा (रज़ि0) कहते हैं कि एक आदमी ने अल्लाह के पैग़म्बर (सल्ल0) से पूछा, ''बच्चों पर माँ-बाप के क्या अधिकार हैं?" अल्लाह के पैग़म्बर (सल्ल0) ने फ़रमाया, ''तुम्हारे माँ-बाप तुम्हारा स्वर्ग भी हैं और नरक भी (यानी माँ-बाप की सेवा करके स्वर्ग में जा सकते हो और उनकी नाफ़रमानी (अवज्ञा) करके या उन्हें दुख देकर नरक में अपना ठिकाना बना सकते हो)।" (हदीस: इब्ने-माजा)

(9) अल्लाह के पैग़म्बर (सल्ल0) ने एक सहाबी (रज़ि0) ने कहा, ''मेरी सेवा और अच्छे व्यवहार का सबसे ज़्यादा हकदार कौन है?" पैग़म्बर (सल्ल0) ने फ़रमाया, ''तुम्हारी माँ।" सहाबी के पूछने पर उन्होंने तीन बार माँ का हक़ बताया। उसके बाद फ़रमाया कि तुम्हारा बाप (तुम्हारे अच्छे व्यवहार का हकदार है)।" (हदीस: बुख़ारी, मुस्लिम)

(10) अल्लाह के पैग़म्बर (सल्ल0) ने फ़रमाया, '' अल्लाह जिसको सन्तान दे उसे चाहिए कि उसका अच्छा नाम रखे, उसको अच्छी शिक्षा दे, अच्छी आदतें और ढंग सिखाए। फिर जब वह बालिग़ (व्यस्क) हो जाए तो उसकी शादी करे। अगर उसने सही समय पर शादी नहीं की और सन्तान ने कोई पाप कर लिया तो वह (बाप) उस पाप में हिस्सेदार माना जाएगा।" (हदीस: बैहक़ी फ़ी-शुअबिल-ईमान)

(11) अल्लाह के पैग़म्बर (सल्ल0) ने फ़रमाया, ''जिसने तीन बेटियों की परवरिश की, उन्हें अच्छा अदब सिखाया (अर्थात् अच्छे संस्कार दिए), उनकी शादी की और उनके साथ अच्छा व्यवहार किया, वह स्वर्ग में जाएगा।'' (हदीस: अबू-दाऊद)

(12) अल्लाह के पैग़म्बर (सल्ल0) ने फ़रमाया, '' ईमानवालों में सबसे बढ़कर ईमानवाला वह है जिसका अख़लाक़ (आचरण) अच्छा हो। तुममें बेहतरीन (श्रेष्ठ) लोग वे हैं जो अपनी पत्नियों से अच्छा व्यवहार करते हैं। (हदीस: तिरमिज़ी)

(13) हज़रत मुआविया क़ुशैरी (रज़ि0) के पूछने पर अल्लाह के पैग़म्बर (सल्ल0) ने फ़रमाया, ''तुम अपनी पत्नियों को वह खिलाओ जो ख़ुद खाते हो और उन्हें वह पहनाओ जो तुम पहनते हो, उनकी पिटाई न करो और उन्हें बुरा न कहो!'' (हदीस: अबू-दाऊद)

(14) अल्लाह के पैग़म्बर (सल्ल0) ने फ़रमाया, ''रिश्तों को तोड़नेवाला स्वर्ग में नहीं जाएगा।'' (हदीस: बुख़ारी)

(15) अल्लाह के पैग़म्बर (सल्ल0) ने फ़रमाया, ''वह व्यक्ति जन्नत में नहीं जाएगा जिसकी बुराई और उपद्रवों से उसका पड़ोसी सुरक्षित न हो।'' (हदीस: मुस्लिम)

(16) हज़रत अब्दुल्लाह-बिन-उमर (रज़ि0) बयान करते हैं कि अल्लाह के पैग़म्बर (सल्ल0) ने फ़रमाया, ''मजदूर का मेहनताना उसका पसीना सूखने से पहले दे दो।'' (हदीस: इब्ने-माजा)

(17) अल्लाह के पैग़म्बर (सल्ल0) ने फ़रमाया, ''जब तुम बीमार के पास जाओ तो उससे कहो, ''अभी तुम्हारी उम्र बहुत है। यह बात अल्लाह के किसी फ़ैसले को रद्द नहीं करेगी लेकिन इससे बीमार का दिल ख़ुश हो जाएगा।'' (हदीस: तिरमिज़ी)

(18) अल्लाह के पैग़म्बर (सल्ल0) ने फ़रमाया, ''रास्तों से कष्टदायक चीज़ों को हटा देना भी सदक़ा (नेकी) है।'' (हदीस: बुख़ारी)

(19) हज़रत वासिला-विन-असफ़ल (रज़ि0) कहते हैं कि मैंने अल्लाह के पैग़म्बर (सल्ल0) से पूछा, ''पक्षपात क्या है?'' पैग़म्बर (सल्ल0) ने फ़रमाया, ''पक्षपात यह है कि तुम अन्याय के मामले में अपनी क़ौम की मदद करो।'' (हदीस: अबू-दाऊद)

(20) अल्लाह के पैग़म्बर (सल्ल0) ने फ़रमाया, ''जिस व्यक्ति ने बताए बिना ऐबदार (जिसमें कोई ख़राबी हो) चीज़ बेच दी, वह हमेशा अल्लाह के ग़ज़ब (प्रकोप) में रहेगा और फ़रिश्ते उसपर फटकार भेजते रहेंगे।'' (हदीस: इब्ने-माजा)